Tuesday, 5 April 2016

बलात्कारी कोच को 11 साल की सजा

 विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) प्रीतू शर्मा की अदालत ने कराटे कोच को अपनी शिष्या के साथ बलात्कार करने के मामले में सोमवार को 11 साल का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने कराटे कोच को नशीला पदार्थ खिलाने का दोषी नहीं माना है।

विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह नेगी के अनुसार बुलंदशहर जिले के सियाना निवासी वीरेंद्र सिंह राठौर लामाचौड़ में किराये पर रहते थे। इसी क्षेत्र में वह कराटे भी सिखाते थे। जुलाई 2014 में एक दिन एक खिलाड़ी उन्हें फीस देने के लिए उनके घर आई। उस समय कोच कमरे में अकेले थे।

आरोप है कि उन्होंने बहला फुसलाकर खिलाड़ी को नशीला पदार्थ खिला दिया। बेहोश होने पर उन्होंने खिलाड़ी के साथ दुराचार किया। इसके साथ ही उसने खिलाड़ी की फोटो भी खींच ली। आरोप है कि इसके बाद फोटो के जरिये वह खिलाड़ी के साथ ब्लैकमेल कर दुराचार करता था

। खिलाड़ी ने इस मामले की शिकायत परिजनों से भी की। खिलाड़ी के पिता ने 20 जुलाई 2014 को कोतवाली में बलात्कार सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमे की विवेचना लता बिष्ट और पुनीता बलौदी ने की और कोच वीरेंद्र  के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

इस मामले में अदालत ने कोच को बलात्कार का दोषी माना। सोमवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नशीला पदार्थ खिलाने की धारा से अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन धारा 376(2च) के तहत 11 साल की कैद और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 354 क (आई) और धारा 354 घ (आई) के तहत दो-दो वर्ष की सजा के साथ एक-एक हजार रुपये अंर्थदंड लगाया है। अदालत ने धारा 506 के तहत पांच साल की कैद और दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। 

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