आम और लीची की मिठास गौरया और गिलहरियों की जान पर भारी पड़ रही है.
दरअसल, अच्छी पैदावार और मिठास के लिए किसान अपने बागों में आम और लीची के पेड़ो पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन यह छिड़काव गौरया और गिलहरियों की जान पर भारी पड़ रहा है.
भाबर क्षेत्र के गूलरझाला क्षेत्र में दो ऐसे मामले समाने आए हैं, जहां बाग मालिक द्वारा लीची और आम के पेड़ों पर कीटनाशकों का छिड़काव किया गया तो अगले दिन पेड़ों के नीचे कई गिलहरियां और गौरया मरी पड़ी मिलीं.
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दरअसल, अच्छी पैदावार और मिठास के लिए किसान अपने बागों में आम और लीची के पेड़ो पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन यह छिड़काव गौरया और गिलहरियों की जान पर भारी पड़ रहा है.
बाग मालिक ने जानकारी देते हुए बताया कि आम और लीची की फसल को कीटों से बचाने के लिए उसने बाजार से लाए कीटनाशक का पेड़ों पर छिड़काव किया गया था, लेकिन अगले दिन सुबह पेड़ों के नीचे गिलहरियां और गौरया मरी पड़ी थी.
उधर दूसरी ओर उधान विभाग के जानकारों की यदि मानें तो कीटनाशकों में जहर होता है, जिसका छिड़काव ही पेड़ों पर इसलिए किया जाता है कि कोई रोग पेड़ों पर न लगे, लेकिन यदि अधिक मात्रा में इसका छिड़काव किया जाता है तो यह हानिकारक भी साबित हो सकता है.
कोटद्वार और उसके पास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान आम और लीची की पैदावार करते है और हर साल लाखों रुपए का व्यापार भी इन्हीं फसलों के माध्यम से करते है, लेकिन गिलहरियों और गौरया के मरने के चौकाने वाले खुलासे ने इन किसानों को भी झकझोर कर रख दिया है.
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