उत्तराखंड पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह का कहना है कि चट्टानों की बनावट पता नहीं चलती। ट्रीटमेंट के बाद भी जलस्रोत रिचार्ज नहीं होते। वाडिया के विज्ञानियों से शोध करवा कर स्थिति का पता लगाया जाएगा। उत्तराखंड जलसंस्थान के महाप्रबंधक एसके गुप्ता का कहना है कि खेती बंद होने से जलस्रोत सूख जाते हैं।
खेतों में पानी भरने से जलस्रोत रिचार्ज होते हैं। जिन स्थानों पर पलायन हुआ है और खेती नहीं होती, वहां जलस्रोत अधिक सूखे हैं। खेती के लिए लोग वर्षा जल संचयन भी किया करते थे, जो अब नहीं हो पा रहा है।
जलस्रोतों का ट्रीटमेंट कारगर साबित नहीं हो रहा है। स्थिति से निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही खेती बंद होने से भी इसकी दिक्कत बढ़ गई है। लोगों को खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- एस. राजू, अपर मुख्य सचिव
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