Thursday, 7 April 2016

हाईकोर्ट ने कहा उत्तराखंड में अपनी मनमानी बंद करे केंद्र, अगली सुनवाई कल

उत्तराखंड संकट पर सख्‍त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को नसीहत दे डाली। हाईकोर्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र अपनी मनमानी बंद करे। लंच के बाद शाम साढ़े चार बजे कोर्ट की सुनवाई पूरी हो गई। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार 8 अप्रैल को होगी।

गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन के मामले में अब मनमानी बंद कर देनी चाहिए। हम याचिकाकर्ता के हितों की रक्षा करेंगे। अगर केंद्र की मनमानी ऐसे ही जारी तो उत्तराखंड से धारा 356 हटा दी जाएगी।

इसके साथ ही उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को हाईकोट में एक नई याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने कहा है कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए पहले कांग्रेस को ‌मौका मिले न की भाजपा को।ले‌किन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के लिए आगामी 19 अप्रैल तक रोक लगा दी है। बजट अध्यादेश के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र को 12 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। बजट अध्यादेश पर अगली सुनवाई आगामी 18 अप्रैल को होगी।

गुरुवार को अदालत में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका और बजट अध्यादेश पर सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू हुई। जैसे ही कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बजट अध्यादेश पर अदालत से वक्त मांगा, लेकिन अभिषेक मनुसिंघवी ने इसका विरोध किया। मनुसिंघवी का कहना था कि केंद्र सरकार मामले को लटकाना चाहती है।

बुधवार को कोर्ट में दिनभर सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बहस की तैयारी के लिए बुधवार की कार्यवाही रोक कर कुछ समय और मांगा गया लेकिन कोर्ट ने उन्हें समय न देते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी। इस पर केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी गुरुवार को बहस की।

मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई हुई थी। पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से सुप्रीम कोर्ट से पैरवी करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को दिनभर बहस की।

मामले के अनुसार उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में पूर्व में केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड विधानसभा में 31 मार्च को मतदान किए जाने संबंधी एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।

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