Friday, 8 April 2016

‘झाड़ियों में नहीं छिपते तो हो जाती अनहोनी’

उत्तरकाशी की लाल घाटी में छह अप्रैल की रात सिपाही अनंत यादव की शहादत की घटना ने देहरादून एसएसपी डॉ. सदानंद दाते को 22 फरवरी 2012 की उस काली रात की याद को ताजा कर दिया, जिसमें उनपर और उनके साथियों की जान पर बन आई थी।

वन्य जीव तस्करों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बदमाश-बदमाश का हल्ला मचा दिया। इससे बारातियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। अतिरिक्त पुलिस बल के आने तक उन्हें कई घंटे झाड़ियों के बीच गुजारने पड़े थे। उत्तरकाशी के चिन्याली सौड़, चोपडाली, दिखोली और चौंदियाट गांव का इलाका वन्य जीव और चरस आदि की तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

राजस्व पुलिस के इस इलाके में सिविल पुलिस की कामयाबी का ग्राफ बेहद नीचे था। एसटीएफ सिपाही अनंत यादव की हत्या ने पुलिस विभाग को झकझोर दिया है। एसटीएफ के एसएसपी रहते हुए डा दाते का सिपाही यादव से नजदीकी जुड़ाव रहा है। क ई मामलों में सिपाही ने उत्कृष्ट कार्य किए थे।

कप्तान बताते हैं कि उत्तरकाशी में एसपी रहते समय उनके सामने ही ऐसे ही हालात बने थे। वन्य जीव तस्करों की सौदेबाजी की खबर पर एसओजी टीम को चिन्याली चोपडाली इलाके में भेजा गया था। एक तस्कर पकड़ा गया तो गांव में बदमाशों के आने का हल्ला मचा दिया गया।


ssp sadanand daate tell the story of terror


पास में एक बारात ठहरी थी। बारातियों ने पुलिस बल पर हमला कर दिया, जिसमें पहली टीम के कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। रात के अंधेरे में उन्हें टीम के साथ कई घंटे झाड़ियों में बीताने पड़े थे। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल आने के बाद तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

उत्तरकाशी एसपी का काम देखेंगे ददन पाल
एसटीएफ के सिपाही अनंत यादव की हत्या के बाद पुलिस मुख्यालय में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक ददन पाल सिंह उत्तरकाशी के एसपी की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। यहां रहे एसपी अनंत शंकर ताकवाले को ऊधम सिंह नगर जिले का कप्तान बनाकर भेजा गया था, तब से यह पद खाली है।

कई थानों में रहा आरक्षी
शहीद आरक्षी अनंत कुमार यादव हरिद्वार जिले के सराय गांव का रहने वाला था। 20 जुलाई 1979 को जन्मे अनंत 11 अक्तूबर 2001 को पुलिस में भर्ती हुआ था। दून के कई थानों में रहा अनंत की 18 अगस्त 2014 को एटीएफ में नियुक्ति हुई थी। रात में गोली लगने की खबर मिलने के बाद एसएसपी डा सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह ने दून से एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम भेजी थी पर उनके पहुंचने से पहले सिपाही ने दम तोड़ दिया था।

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