आज के टेलिविजन युग का अगर कोई मीडियम बेव रेडियो स्टेशन मुकाबला कर पा रहा है तो वह आकाशवाणी का नजीबाबाद रेडियो स्टेशन है.
उत्तराखंड़ के लिए बनाया गया यह रेडियो स्टेशन भले ही उत्तरप्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद में स्थित हो, लेकिन पिछले 30 सालों में यह रेडियो स्टेशन उत्तराखंड की आवाज बनकर उभरा है. लेकिन, अफसोस पूरे देश में सबसे अधिक रेडियो के श्रोताओं वाले आकाशवाणी के इस रेडियो स्टेशन को अब गुपचुप तरीके से दून शिफ्ट किया जा रहा है. जिसके चलते पहाड़ की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को झटका तो लगा ही है साथ ही सामरिक दृष्टि से खतरा भी उत्पन्न होने लगा है.

पिछले 30 सालों से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम करने वाले आकाशवाणी के नजीबाबाद रेडियो स्टेशन से उत्तराखंड का प्रसारण बंद होने जा रहा है.
दरअसल, 200 किलोवाट क्षमता वाले इस रेडियो स्टेशन को गुपचुप तरीके से नजीबाबाद से देहरादून सिफ्ट करने की योजना चल रही है. आज के टेलिविजन के युग में भी उत्तराखंड़ के दूर-दराज के क्षेत्रों को देश-दुनिया से जोड़ने वाले इस रेडियो ने पिछले 3 दशक में जिस प्रकार से पहाड़ की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को बचाने में अपना योगदान दिया उतना शायद ही किसी ने दिया हो.
इतना ही नही सामारिक दृष्टि से भी आकाशवाणी नजीबाबाद का रेडियो स्टेशन उत्तराखंड की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है. चीन और नेपाल से उत्तराखंड़ की लगी सीमाओं में जहां संचार का कोई साधन नहीं है वहां आज भी आकाशवाणी का नजीबाबाद रेडियो जवानों के साथ ही वहां के लोगों का संचार का प्रमुख साधन भी है.
हालांकि, देहरादून में आकाशाणी के नए केन्द्र की स्थापना जरुर की जा रही है, लेकिन मात्र 10 किलोवाट क्षमता वाले इस रेडियो स्टेशन की पहुंच वहां तक हो पाएगी इसको लेकर संशय के बादल मंडराने लगे हैं. जिसके चलते उत्तराखंड की सुरक्षा के लिए खतरा तो उत्पन्न होगा ही साथ ही लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं के सरंक्षण को भी धक्का पहुंचेगा.
उत्तराखंड़ के लिए बनाया गया यह रेडियो स्टेशन भले ही उत्तरप्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद में स्थित हो, लेकिन पिछले 30 सालों में यह रेडियो स्टेशन उत्तराखंड की आवाज बनकर उभरा है. लेकिन, अफसोस पूरे देश में सबसे अधिक रेडियो के श्रोताओं वाले आकाशवाणी के इस रेडियो स्टेशन को अब गुपचुप तरीके से दून शिफ्ट किया जा रहा है. जिसके चलते पहाड़ की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को झटका तो लगा ही है साथ ही सामरिक दृष्टि से खतरा भी उत्पन्न होने लगा है.
पिछले 30 सालों से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम करने वाले आकाशवाणी के नजीबाबाद रेडियो स्टेशन से उत्तराखंड का प्रसारण बंद होने जा रहा है.
दरअसल, 200 किलोवाट क्षमता वाले इस रेडियो स्टेशन को गुपचुप तरीके से नजीबाबाद से देहरादून सिफ्ट करने की योजना चल रही है. आज के टेलिविजन के युग में भी उत्तराखंड़ के दूर-दराज के क्षेत्रों को देश-दुनिया से जोड़ने वाले इस रेडियो ने पिछले 3 दशक में जिस प्रकार से पहाड़ की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं को बचाने में अपना योगदान दिया उतना शायद ही किसी ने दिया हो.
इतना ही नही सामारिक दृष्टि से भी आकाशवाणी नजीबाबाद का रेडियो स्टेशन उत्तराखंड की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है. चीन और नेपाल से उत्तराखंड़ की लगी सीमाओं में जहां संचार का कोई साधन नहीं है वहां आज भी आकाशवाणी का नजीबाबाद रेडियो जवानों के साथ ही वहां के लोगों का संचार का प्रमुख साधन भी है.
हालांकि, देहरादून में आकाशाणी के नए केन्द्र की स्थापना जरुर की जा रही है, लेकिन मात्र 10 किलोवाट क्षमता वाले इस रेडियो स्टेशन की पहुंच वहां तक हो पाएगी इसको लेकर संशय के बादल मंडराने लगे हैं. जिसके चलते उत्तराखंड की सुरक्षा के लिए खतरा तो उत्पन्न होगा ही साथ ही लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं के सरंक्षण को भी धक्का पहुंचेगा.
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