Monday, 4 April 2016

कांग्रेस और भाजपा ने तोड़े है उत्तराखंड राज्य के सपने

उतराखंड राज्य को बने भले ही 16 साल हों गए हो, लेकिन उतराखंड की जनता को अपने सपनों के इस उत्तराखंड राज्य को पाने के लिए एक लंबा संघर्ष ही नहीं करना पड़ा. बल्कि इस राज्य को पाने के लिए कई लोगों से अपनी शाहदत तक दी है.
उसमें शाहदत में सब से पहला नाम खटीमा गोलीकांड का है. जिसने इस राज्य की नीव रखने का काम किया है.
कांग्रेस और भाजपा ने तोड़े है उत्तराखंड राज्य के सपनेउत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन राष्ट्रपति शासन लगवाने के लिए भी ये दोनों ही राजनितिक दल जिम्मेदार है. बहरहाल 16 साल की उम्र वाले उत्तराखंड और यहां की जनता के लिए यह सही फैसला नहीं. साथ ही विकसित कामयाबी को छुता उत्तराखंड बनने का उनका सपना अभी भी अधूरा है.
खटीमा गोली कांड से राज्य बनने तक के इतिहास को समेटे प्रमुख राज्य आंदोलनकारी शेर सिंह डिगरी के पास रखी फाइलों का हमने जायजा लिया.
उन के पास रखी फाइलें किसी सरकारी दफ्तर की नहीं बल्कि उतराखंड आंदोलन और खटीमा गोलीकांड के अपने इतिहास को अपने में समेटे हुए है. इन फाइलों के पलटते पन्ने इस बात की गवाही दे रहे है कि इस राज्य को पाने के लिए लोगों ने  अपनों को खोया है. साथ ही इस बात की भी तस्दीक कर रहे है कि अपने सपनों के राज्य को पाने के लिए उस वक्त पुलिस प्रशासन ने जनता के सिने पर न सिर्फ गोलियां चलाई बल्कि बर्बरता पूर्वक जुल्म और सितम भी ढाऐ थे.
उस आंदोलन में जहां 7 लोंगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी. वहीं 165 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. उसके बावजूद आंदोलनलोकारी खुद को बीते इन 16 सालो में सत्ता में काबिज रहे राजनितिक दलों से खुद को ठगासा महशूस कर रहे हैं.
1 सितम्बर 1994 को हजारों की संख्या स्थानीय लोग राज्य की मांग के लिए सड़को में थे. जिसमें महिलाए पहली बार अपने बच्चों तक को लेकर सड़कों में उतर आई थी. इस बात से बेखबर कि पुलिस की गोली का निशाना कोई अपना ही बनने वाला है.
इसी दौरान तत्कालीन कोतवाल डी के केन के निर्देश में चली गोलीयों से जहां 7 आंदोलनकारियों की मौत हो गई और कई आंदोलनकारी आज तक लापता है.
खटीमा गोलीकांड के दिन उन 7 शहीदों में एक सरदार परमजीत सिंह भी थे. जिनके पिता नानक सिंह सतर साल की उम्र जहां गांव-गांव में भटक कर चश्मे बेच कर अपने परिवार को पाल रहे है. वहीं अपने बेटे परमजीत की शहादत पर गर्व तो करते है, लेकिन अबतक सरकार की ओर से की जा रही अपेक्षा से आहत होकर आत्महत्या करने की बात कहने लगे है.

No comments:

Post a Comment